दुनिया के सबसे ऊंचे हवामहल का इतिहास Hawa Mahal History in Hindi

दुनिया के सबसे ऊंचे हवामहल का इतिहास | Hawa Mahal History in Hindi – दोस्तों हवामहल राजस्थान राज्य के जयपुर ज़िले में स्थित है। जो व्यक्ति बहुत ज्यादा घूमते है, जिनको नयी-नयी जगहों के बारे में जानने की रूचि है या फिर जिन्हें घुमना पसंद है, तो आज का यह Hawa Mahal History आर्टिकल उन लोगों के लिए बहुत ही फायदेमंद साबित होने वाला है। आपको इससे बहुत कुछ रखने को मिलेगा। इसलिये मेरा आपसे अनुरोध है कि Hawa Mahal History आर्टिकल को पूरा जरूर पढ़िए।

जैसा कि आप सभी जानते है कि भारत अपने पर्यटन स्थलों के लिए काफी ज्यादा प्रसिद्ध है। भारत में बहुत से ऐसे प्राचीन मंदिर, महल, किले है, जिनसे भारत के इतिहास का पता चलता है। आज हम आपको एक ऐसे ही स्थान के बारे में बताने जा रहे है जो कि अपनी सुंदरता व संरचना के लिए भारत में ही नही अपितु सम्पूर्ण विश्व में प्रसिद्ध है। जिसका नाम है – Hawa Mahal तो चलिये शुरू करते है:- Hawa Mahal History in Hindi

हवामहल का इतिहास Hawa Mahal History in Hindi

दोस्तों हवामहल, राजस्थान की राजधानी जयपुर में स्थित है। जयपुर को हम सभी गुलाबी नगरी से भी जानते है, और आप सभी को यह तो पता ही होगा कि हम सभी जयपुर को गुलाबी नगरी क्यों कहते है? अगर आपको नही पता तो कोई बात नही, हम बता देते है। दोस्तों, पूरे जयपुर शहर में घर, मंदिर, महल आदि सभी गुलाबी रंग से रंगे हुए है। इससे पूरा जयपुर शहर गुलाबी दिखाई देता है, इसीलिए जयपुर शहर गुलाबी नगरी के नाम से जाना जाता है।

हवामहल भी गुलाबी रंग से रंगा हुआ है। हवामहल का निर्माण जयपुर के महाराजा सवाई प्रताप सिंह ने सन 1798 ईस्वी में करवाया था। हवामहल की रूपरेखा भगवान कृष्ण के मुकुट के भाँति ही तैयार की गई है। इसकी रूपरेखा प्रसिद्ध वास्तुकार लाल चंद उस्ताद ने तैयार की थी। बिना किसी आधार के हवामहल दुनिया का सबसे ऊँचा महल है। हवामहल को “Palace of Winds” के नाम से जाना जाता है। Hawa Mahal History

हवामहल की बनावट व संरचना Hawa Mahal Architecture in Hindi

महल के ऊपरी सिरा राजा के मुकुट के भाँति बना हुआ है। इस महल की ऐसी अद्भुत रूपरेखा प्रसिद्ध वास्तुकार लाल चंद उस्ता द्वारा तैयार की गयी थी। हवामहल एक 5 मंजिला ईमारत है। इसकी सबसे ऊपरी मंजिल तो केवल डेढ़ फ़ुट चौड़ी है। अगर हम हवामहल को बाहर से देखते है, तो यह महल किसी मधुमक्खी के छत्ते के जैसा दिखाई देता है।

हवामहल की सबसे खास बात यह है कि इसमें कुल 953 खिड़कियां है। यह छोटी-छोटी जालीदार खिड़कियां बहुत ही सुंदर व आकर्षक है। इन खिड़कियों को झरोखे कहे जाते है। कहा जाता है कि हवामहल में अनेकों जालीदार खिड़कियों को बनाने की रूपरेखा सोच-समझकर तैयार की गयी थी। ऐसा इसलिए किया गया था, क्योंकि राजस्थान के राजपूती राजघरानों की महिलाएं किसी को सामने से नही देखती थी।

राजघरानों की महिलाएं परम्परागत “पर्दा प्रथा” के नियम की पालना करती थी। राजपूती महिलाएं महल के बाहर हो रही सभी गतिविधियों को देख सके, इसलिए हवामहल में अनेकों जालीदार खिड़कियों का निर्माण किया गया था। हवामहल की इन जालीदार खिड़कियों की सबसे खास बात यह है कि इनमें से हमेशा, यहां तक कि गर्मियों में भी ठंडी हवामहल में आती रहती है, और यहां का माहौल शीतल रहता है। इन खिड़कियों में खूबसूरत नक्काशी का प्रयोग हुआ है, जिनमें कँगूरे व गुम्बद बने हुए है।

Hawa Mahal History in Hindi

हवामहल, जयपुर शहर के बिल्कुल बीच में स्थित है। इसे लाल चुना व बलुआ पत्थरों से बनाया गया है। देखा जाए तो हवामहल सिटी पैलेस से जुड़ा हुआ है, जो कि महिलाओं के कमरों तक जाता है। प्रातःकाल में सूर्य के प्रकाश के सामने यह महल बहुत ही खूबसूरत व कला के अनूठा संगम के समान दिखाई देता है।

सिटी पैलेस से सीधा ही हवामहल के शाही द्वार से प्रवेश कर सकते है। यह द्वार एक बहुत बड़े आँगन तक जाता है। इस दरवाज़े के तीनों तरफ़ 2 मंजिला इमारतें है। City Palace के पूर्व दिशा की तरफ़ हवामहल स्थित है। हवामहल में एक बहुत पुराना संग्रहालय भी स्थित है। हवामहल की बहुत खूबसूरत आकृति के कारण यह हवामहल सवाई जय सिंह का सबसे पसंदीदा स्थान था। यहाँ पर जय सिंह आराम किया करते थे।

हवामहल की कुल ऊंचाई 50 फ़ीट (15 मीटर) है। यह महल एक 5 मंजिला ईमारत है। हवामहल की ऊपरी 3 मंजिलें तो इतनी छोटी है कि इनकी चौड़ाई सिर्फ एक कमरें के जितनी ही है। इसके अलावा नीचे वाली 2 मंजिलों के ठीक सामने एक खुला आँगन है। यह आँगन महल के पीछे स्थित है। हवामहल का सामने का भाग सड़क से देखा जा सकता है।

Hawa Mahal History

हवामहल अनूठी कलाकृति का एक बेजोड़ संगम है। इसमें बहुत से अर्द्ध-अष्टभुजा की आकृति के समान झरोखें बने हुए है। इससे हवामहल सम्पूर्ण विश्वभर में प्रसिद्ध है। महल के अंदर पीछे की ओर अनेक कमरें मौजूद है। इन कमरों में ख़म्भे व गलियारें भी मौजूद है और ये कमरें महल के ऊपर तक इसी प्रकार से है।

वास्तुकार लाल चंद उस्ताद  Architecture Lalchand Ustad

लाल चंद उस्ताद प्राचीनकाल का एक प्रसिद्ध वास्तुकार था। जिसने हवामहल की आकृति तैयार की थी। इन्होंने हवामहल की शिल्पकला व वास्तुकला को अनूठा संगम प्रदान किया है। लाल चंद उस्ताद ने जयपुर की शिल्पकला व वास्तुकला की रूपरेखा को भी तैयार किया था। हवामहल का पिछला भाग बिल्कुल Simple है। हवामहल की वास्तुकला शैली में हिन्दू व मुग़ल शैली का अनूठा संगम है।

हवामहल की देखभाल व मरम्मत Care of Hawa Mahal

हवामहल की देखभाल राजस्थान राज्य का पुरातात्विक विभाग द्वारा किया जाता है। सन 2005 ईस्वी में लगभग 50 वर्षों बाद इस महल की बहुत अधिक मरम्मत की गयी थी।

इस मरम्मत कार्य में लगभग 45679 लाख रुपये लगे थे। आज के समय में हवामहल की देखरेख की बात की जाए तो कुछ ऐसी संस्थायें है, जो कि महल के रखरखाव की जिम्मेदारी को समझ रही है। फ़िलहाल आज के समय में “Unit Trust of India” ने हवामहल का सम्पूर्ण जिम्मा अपने ऊपर ले रखा है।

तो दोस्तों, यह था Hawa Mahal History व इसकी Architecture के बारे में सम्पूर्ण जानकारी। मैंने आप सभी को हवामहल के बारे में सब कुछ बता दिया है। आशा करता हूँ कि यह आपको जरूर पसन्द आया होगा।

हवामहल कैसे पहुँचे  How to Reach Hawa Mahal

अगर आप जयपुर घूमना चाहते है या फिर हवामहल देखना चाहते है। लेकिन आपको यह पता नही है कि आप यहाँ कैसे पहुंच सकते है तो, आपको जरा भी टेंशन लेने की जरूरत नही है। क्योंकि हम आपका पूरा मार्गदर्शन करेंगे। Hawa Mahal History in Hindi

आप यहाँ हवाई जहाज, रेलगाड़ी व बस किसी भी प्रकार से यात्रा कर सकते है। अगर आप सड़क मार्ग से यहां आना चाहते है तो आप जयपुर-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग 8 के द्वारा यहाँ आ सकते है।

इसके अलावा आप यहाँ हवाई जहाज से भी आ सकते है। जयपुर से 7 किलोमीटर दूर ही हवाई अड्डा स्थित है। आप रेलगाड़ी के द्वारा भी आ सकते है। रेलवे स्टेशन, जयपुर से 5 किलोमीटर की दूरी पर ही स्थित है। Hawa Mahal History

हवाई अड्डा:- जयपुर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा

बस स्टेशन:- सिंधी कैम्प, जयपुर

रेलवे स्टेशन:- जयपुर जंक्शन

विश्रामगृह  Places to Stay at Jaipur

आप यहाँ होटल, धर्मशाला व अतिथि-गृह में रूक सकते है। आपके बजट के अनुसार सभी प्रकार के विश्रामगृह मौजूद है।

Hawa Mahal Entry Fee (प्रवेश शुल्क)

भारतीय निवासी              –     20 रुपये

विदेशी पर्यटक                –     50 रुपये

कैमरा शुल्क (भारतीय)    –     10 रुपये

कैमरा शुल्क (विदेशी)      –     30 रुपये

हवामहल में प्रवेश-समय अवधि:-

1 – 2 घण्टे

Hawa Mahal Entry Timings (प्रवेश समय):-

9:30 A.M.  –  4:30 P.M.

हवामहल जाने का सबसे अच्छा समय | Best Time to Visit Hawa Mahal:-

अक्टूबर – मार्च

हवामहल का पता | Address of Hawa Mahal:-

Hawa Mahal ROad, Badi Chopad, J.D.A. Market, Pink City, Jaipur, Rajasthan – 302002

हवामहल के आसपास के आकर्षण | Places to Visit Nearby of Hawa Mahal:-

City Palace

Jantar Mantar

Govind Dev ji Temple

Jal Mahal

हवामहल पहुँचने के साधन:-

महल तक आप आसानी से किसी भी ऑटो-रिक्शा या बस के माध्यम से पहुँच सकते है।

हवामहल जाते समय आवश्यक निर्देश व चेतावनी | Instructions About Hawa Mahal:-

दोस्तों अगर आप हवामहल जा रहे है या फिर जाना चाहते है तो आपको वहाँ शीत ऋतु में जाना चाहिए। गर्मियों में नही जाना चाहिए।

Conclusion:-

तो दोस्तों, यह था भारतीय इतिहास के सबसे आकर्षक Hawa Mahal History in Hindi. अंत में दोस्तों में सिर्फ यही कहना चाहता हूँ कि Hawa Mahal जैसा अन्य महल शायद ही कोई और होगा। आशा करता हूँ की Hawa Mahal History के बारे में दी गयी जानकारी आपको जरूर पसंद आयी होगी। आपका बहुमूल्य समय देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।

अगर आपके मन में Hawa Mahal History से सम्बंधित किसी भी प्रकार का Question है तो आप हमसें Comment के माध्यम से पूछ सकते है। हम आपके Question का जवाब देने की पूरी कोशिश करेंगे। आगे भी हम आपके लिए ऐसे ही उपयोगी आर्टिकल लाते रहेंगे।

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धन्यवाद… Read More:- गोलकोण्डा किले का इतिहास | Golconda Fort History in Hindi

गोलकोण्डा किले का इतिहास: Golconda Fort History in Hindi

Golconda Fort History in Hindi

गोलकोण्डा किले का इतिहास | Golconda Fort History in Hindi:- दोस्तों, भारत अपने इतिहास और भूगोल के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। भारत में बहुत से किले और महल है जो कि अपने इतिहास के लिया विश्व में प्रसिद्ध है। आज हम भारत के एक ऐसे किले का इतिहास आपके लिये लेकर आये है। जिसका नाम है गोलकोण्डा किला।

यह किला दक्षिणी भारत में, हैदराबाद से 5 मील दूर पश्चिम में स्थित है। यह किला सूंदर व मनमोहक किला है। यह किला भारत के पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।  Golconda Fort History in Hindi| गोलकोण्डा का नाम दो शब्दों से मिलकर बना है। गोल्ला का अर्थ है- गडरिया तथा कोण्डा का अर्थ है- पहाड़ी।

यह किला एक पहाड़ी पर बना हुआ है।  कहा जाता है कि इस किले के निर्माण का सुझाव ककाटिया के राजा को एक गडरिया ने दिया था। इसलिए इस किले का नाम गोलकोण्डा पड़ा। गोलकोण्डा किले के दक्षिणी भाग में मुसी नाम की एक नदी बहती है।

गोलकोण्डा किले का इतिहास । Golconda Fort History 

Golconda Fort History in Hindi:- गोलकोण्डा किला मूल रूप से मनकल नाम से जाना जाता है। इस किले का निर्माण ककाटिया द्वारा किया गया था।उन्होंने इसका निर्माण अपने कोंडापल्ली किले को पश्चिम से सुरक्षित करने के लिए किया था। गोलकोण्डा किले को ग्रेनाइट की पहाड़ी पर बनाया गया था।

जिसकी ऊँचाई लगभग 120 मीटर है। इस किले में बहुत से युद्ध हुए। जिस कारण ये काफी छतिग्रस्त हो गया था। फिर वहाँ की रानी रुद्रमा देवी ने इस किले का पुननिर्माण करवाया था। तथा उनके उत्तराधिकारी प्रतापरुद्र ने इसे मजबूत करवाया था।

कुछ समय बाद इस किले पर मुसुनीरी नायकों ने अपना अधिकार कर लिया। उन्होंने तुगलकी सेना को वारंगल में हराया। सन 1364 ईस्वी में हुई एक संधि में मुसुनुरी कपय भूपति ने यह किला बहमनी सल्तनत को दे दिया।

 

जब यह किला बहमनी सल्तनत के अधिकार में आया तब से गोलकोंडा का विकास होने लगा। तथा उसकी सीमा बढ़ने लगी। उस समय तेलंगाना में एक गवर्नर को भेजा गया। जिसका नाम सुल्तान कुली कुतुब-उल-मुलक था। उन्होंने सन 1501 ईस्वी में गोलकोण्डा किले को अपनी सरकार की सीट बना ली। जिससे बहमनी शासन कमजोर हो गया और हार गये।

उस समय कुल 5 सुल्तान थे। जो आजाद हुए थे। जिसमें से सुल्तान कुली कुतुब-उल-मुलक एक थे। सन 1538 में सुल्तान कुली ने स्वतंत्र रूप से गोलकोंडा पर अपना अधिकार हासिल कर लिया व इस किले पर कुतुबशाही राजवंश का शासन स्थापित किया।

Golconda Fort

इस राजवंश के शासकों ने यहां 62 वर्ष तक शासन किया। उन्होंने इस किले का निर्माण उस तरह करवाया। जैसा की यह अभी बना हुआ है। उन्होंने इस किले की परिधि को 5 किलोमीटर तक और फैला दिया तथा इस पर ग्रेनाइट से पुरे किले की किलाबंदी करवाई गयी। इस किले को अधिक सुरक्षित किया गया। उन्होंने इसे अपनी राजधानी घोषित की।

सन 1590 तक इस किले को कुतुबशाही राजवंश के शासकों ने अपनी राजधानी बनाये रखी। लेकिन इसके बाद उन्होंने अपनी राजधानी को हैदराबाद को बना लिया। कुतुबशाहियों ने इस किले कि सीमा को 7 किलोमीटर तक और बढ़ा दिया। उन्होंने पुरे शहर में दीवारों की घेराबंदी कर दी। सन 1667 में मुग़ल शासक औरंगजेब ने इस किले पर हमला किया और इसे जीत कर इसे लूट लिया। इसके बाद यह किला पूरी तरह से बर्बाद हो गया।

गोलकोण्डा किले की संरचना । Golconda Fort History 

गोलकोण्डा किले का इतिहास: Golconda Fort History  in Hindi

 

Golconda Fort Architecture in Hindi:- गोलकोण्डा किला बहुत ही अद्भुत संरचना से बना हुआ है। यहां बहुत से महल व मस्जिद बनी हुई है। इस किले की बाहरी दीवार 10 किलोमीटर लम्बी है। इस दिवार के सहारे 4 दुर्ग खड़े है। इन दुर्गो में 87 अर्धसूत्रीय बुर्ज बने हुए है। यहां 8 प्रवेश द्वार व 4 उठाऊ पुल है। इस किले के अंदर कई शाही महल, मंदिर, मस्जिद, और अस्तबल मौजूद है। जो इसे बहुत ही आकर्षक बनाते है।

इस किले के सबसे निचले भाग की तरफ एक दरवाजा है। जो “फतह दरवाजा” नाम से जाना जाता है। इस दरवाजा को “विजय दरवाजा” भी कहा जाता था। वैसे तो किले में प्रवेश करने के लिये 8  द्वार है। लेकिन इसका मुख्य प्रवेश द्वार बाला हिसार गेट है। इस गेट पर मोर-मोरनी व शेर-शेरनी की आकृतियां आपको जरूर आकर्षित करेगी। यहां पर चक्र की आकृतियां बनी हुई है।

जादुई ध्वनि

गोलकोण्डा किला वैसे तो अपने इतिहास व आकृति के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है। लेकिन इसके साथ-साथ यहां कुछ ऐसी चीज़े भी देखी जाती है। जो आज भी सभी को अपनी और आकर्षित करती है। जी हाँ दोस्तों, यह किला अपनी जादुई ध्वनि के लिये भी जाना जाता है। यहां आप तालियों के ध्वनि करे तो आपको एक अलग ही प्रकार की ध्वनि सुनाई देगी।

यह तालियों की मंडप नाम से प्रसिद्ध है। यहां प्रजा अपने राजा के पास अपनी फरियाद लेकर आती थी। इस किले की सबसे ऊँची जगह “बाला हिसार” है। जो यहां से कुछ दुरी पर स्थित है। यहां पर आपको काफी आकृतिया भी देखने को मिल सकती है। Golconda Fort History in Hindi

जल व्यवस्था

गोलकोण्डा किले के अधिक ऊँची पहाड़ी पर होने के कारण यहां जल पंहुचा पाना बहुत ही मुश्किल है। इस समस्या से निपटने के लिए इस किले के निर्माता ने जल को संचय व इकठा करने और प्रवाह के लिए एक प्रकार की विशेष तकनीक का उपयोग किया है। उन्होंने पानी को पहुंचने के लिए टेरीकोटा के पाइपों का उपयोग किया था।

इससे यह पता चलता है कि उस समय भी काफी तकनीक विकसित हो चुकी थी। उस समय भी विज्ञान को महत्व दिया जाता था। लेकिन अब महल के इस हिस्से में जाने की अनुमति किसी को भी नहीं है। अब यह किला पूरी तरह से खण्डहर बन चुका है। Golconda Fort History in Hindi

कोहिनूर के लिए प्रसिद्ध

गोलकोण्डा किले को गुफाओं का किला भी कहा जाता है। क्योंकि यहां काफी गुफाए थी। जिसमें से काफी बेशकीमती हिरे व जवाहरात निकले थे। यहां हीरे की काफी बड़ी और विख्यात खदाने थी। यहां पर काफी बेशकीमती खजाने व हीरे मिले। जिनका अपना ही एक इतिहास है। जिनमे से कुछ प्रमुख ये है-

  • दारिया-ए-नूर
  • नूर-उल-ऐन
  • कोह-ए-नूर
  • उम्मीद-ए-डायमंड
  • प्रिंस डायमंड
  • रीजेंट डायमंड

इनमें इस एक सबसे प्रसिद्ध हीरा है- कोहिनूर का हीरा। कोहिनूर का हीरा, गोलकोण्डा के किले से सम्बन्ध रखता है। कोहिनूर का हीरा, बेशकीमती हीरों में से एक है। यह हीरा अंग्रेज अपने साथ लन्दन ले गए। उस समय इस हीरे ने वहाँ की राजकुमारी एलिजाबेथ के ताज की शोभा बढ़ाई। अब यह हीरा लन्दन में बहुत अधिक सुरक्षा में रखा हुआ है।

यह भी भारत की सम्पति है। जिसे अंग्रेज लूटकर ले गए। Golconda Fort गोलकोण्डा में विश्व प्रसिद्ध हीरे जवाहरातों का एक बाजार लगता था। जो पुरे विश्व में प्रसिद्ध था। दूर-दूर से लोग इसे देखने आते थे व यहां से बेशकीमती हीरे ले जाते थे। हमले के बाद ये खदाने पूरी तरह से नष्ट हो गयी और वह बाजार पूरी तरह से ख़त्म हो गया।

गोलकोण्डा के प्रमुख स्थान

गोलकोण्डा किले में प्रवेश करते ही आपको इसकी मजबूत दीवारें दिखाई देगी। ये दिवारें बहुत ही मजबूत व बड़ी है। जिसके दोनों तरफ से घेर कर बीच में एक गलियारा है। इन दीवारो पर सैनिक सुरक्षा के लिए तैनात रहा करते थे। ये दीवारें बहुत ही मजबूत है। मुगल शासकों की तोपें भी इन दीवारों का कुछ नहीं बिगाड़ पायी।

जब आप यहां से आगे जाएंगे तो आपको यहां प्राचीन नक्काशी दिखाई देगी। जो हिन्दू-कला को प्रदर्शित करटी है। इस किले में प्रवेश करने के बाद आपको बहुत से महल दिखाई देंगे। जो अब काफी हद तक खण्डहर बन चुके है। यहां पर और भी काफी देखने लायक जगह है।

जिनमें से हथियार-घर, हब्सी कॉमन्स, तारामती मस्जिद, ऊंट अस्तबल, नगीना बाग़, निजी कक्ष, मुर्दा स्नानघर, रामसास का कोठा, दरबार कक्ष व अम्बर खाना जैसे काफी देखने लायक स्थान है। जो इसके इतिहास का वर्णन करते है। Golconda Fort History in Hindi

गोलकोण्डा किले में प्रमुख स्थान

गोलकोण्डा किले में काफी चढ़ाई के बाद यहां एक मंदिर और मस्जिद है। जो काफी आकर्षित करते है। यहां पर महाकाली का विशाल मंदिर बना है। यहां से कुछ दुरी पर कुछ मकबरे भी मौजूद है। जो काफी टूट चुके है। उन्हें भी आप देख सकते है व यहां के बाग-बग़ीचे भी काफी आकर्षित करते है।

इसे शाही बाग़ भी कहते है। जिसे 4 शताब्दी पहले बनाया गया था। जो काफी सूंदर व मनमोहक है। इस किले में मुख्य रूप से 8 दरवाजे है। जो 3 मील लम्बी दीवार से इस किले को घेरे हुवे है। तो दोस्तों, ये थी इस किले से जुड़ी कुछ बातें। अब हम आपको कुछ जानकारी देंगे जिसकी मदद से आप यह आसानी से घूम सकते है। जैसे कि आप वहां कैसे पहुंच सकते है? व वहां प्रवेश करने के लिए शुल्क है या नहीं ? जिससे आपको ज्यादा परेशानी का सामना न करना पड़े। Golconda Fort

लाइट एंड साउंड शो

गोलकोण्डा किले का इतिहास: Golconda Fort History  in Hindi

 

इस किले में शाम के समय में लाइट एंड साउंड का एक शो आयोजित होता है। जिसमें इस किले के इतिहास से जुडी घटनाओं को बताया जाता है। यह सूंदर व मनमोहक शो 1 घंटे तक चलता है। इसके लिए आपको कुछ शुल्क देना पड़ेगा। Golconda Fort

गोलकोण्डा किले का प्रवेश शुल्क

भारतीय – 15 रुपये
विदेशी पर्यटक – 200 रुपये

कैमरा शुल्क   –  25 रुपये

लाइट एंड साउंड शो शुल्क   –  130 रुपये

गोलकोण्डा किले में प्रवेश समय:-

8:00 A.M. – 5:30 P.M.

गोलकोण्डा किले में प्रवेश अवधि:-

1 – 3 घण्टे

गोलकोण्डा किले का पता

खैर कॉम्प्लेक्स, इब्राहिम बाग, हैदराबाद, तेलंगाना 500008

Conclusion:-

तो दोस्तों, यह थी Golconda Fort History उम्मीद करता हूँ की आपको हमारी यह जानकारी अच्छी लगी होगी। अगर अच्छी लगी हो तो हमारें Golconda Fort History आर्टिकल को लाइक व अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर कीजिये। हमारें Blog को सब्सक्राइब भी कीजिये जिससे आपको हमारें नये आर्टिकल के आने की नोटिफिकेशन मिल जाएगी। आप हमारें Facebook Page को भी जरूर लाइक करे। जिससे आपको हमारें ब्लॉग के बारे में उपयोगी जानकारी मिलती रहेगी।

अगर आपके मन में Golconda Fort से सम्बंधित किसी भी प्रकार का प्रश्न है तो आप हमसें कमेंट के माध्यम से पूछ सकते है। हम आपके प्रश्न का जवाब देने की पूरी कोशिश करेंगे। आगे भी हम आपके लिए ऐसे ही उपयोगी आर्टिकल लाते रहेंगे। Golconda Fort History in Hindi

धन्यवाद…

Mehrangarh Fort History in Hindi