अब आयशा का हक़ीक़त से सामना हो चुका था सब बदल गया था

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haqeeqat se aamna saamna

आयशा का हक़ीक़त से सामना

ये कहानी एक लड़की की है जिसने शादी से पहले एक अलग दुनियाँ देख लिया था आयशा और अभी जो दोनो काफ़ी close relation में थे उन्होंने एक दूसरे से शादी कर ली . 2-4 दिनो बाद वे दोनो honeymoon पे गये दोनो बहुत ख़ुश थे  ख़ूब सारी मस्ती करने के बाद वो वापस अपने घर आए  आयशा को तो पता ही नहि था की इसके बाद कि दुनियाँ उसके पहले कि दुनियाँ से बिलकुल अलग होने वाला है अभी को जाना भी था क्यूँकि  उसका job  आगरा में था but उसकी family allahabad (prayagraj) रहतीं थी तो आयशा को भी wanhi पर रहना था

जब अभी आगरा गया उस दिन बहुत रोयी आयशा उसे लगता कि उसका कोई नहि है उसके पास फिर धीरे धीरे वो अपने ससुराल में wanha के कामों में उलझ गयी अब तो अभी उससे बात भी नहि करता उतना उसे धीरे धीरे अपनी असल की दुनिया समझ आने लगी  फिर  अभी का आना तय हुआ कि वो अगले हफ़्ते आएगा आयशा बहुत ख़ुश थी क्यूँकि वो अभी से मिलने वाली थी जिस दिन अभी आने वाला था उस दिन आयशा ने yellow colour कि saree पहनी थी लाल चूड़ियाँ पहनी थी इतनी सुन्दर लगती जैसे कोई heroin हो  अभी आया उसने उसे खाना खिलाया

फिर अभी ने उससे पूछा की तुम्हारे और माँ के बीच में सब क्या चल रहा है आयशा  को लगा जैसे कि उसे किसी ने बहुत तेज़ से मारा हो क्यूँकि उसने उतना सोचा ही नहि बच्ची थी वो बहुत मासूम घर में जैसे माँ से कभी कभी रूठ जाती शायद सास से भी रूठ गयी उसे ये नहि पता था कि ये उसका वो घर नहि था  जिस घर में उसकी हुकूमत चलती ये तो उसका ससुराल था फिर भी वो हँसके सब ठीक करने में लग गयी वो रो भी नहि सकती क्यूँकि उसके आशु कोई नहि पोंछता बल्कि उसके रोने से फिर कोई topic उठा के तमाशा सब करते . उसे सब समझ आने लगा था

एक दिन अभी पूरे दिन अपने दोस्तों के साथ रहा उसी दिन उसे जाना था रात में आयशा उसका wait करती रही  और फिर सो गयी उठी तो देखा कि अभी बाहर अपने माँ  और बाक़ी family के साथ बैठा है आयशा चुप चाप अंदर आ गयी फिर जब अभी आया तो वो अभी से ग़ुस्सा थी अभी ने हाथ रखा और आयशा ने हाथ हटा दिया फिर अपने कमरे में चली आयी अभी पीछे पीछे आया आयशा मन में ख़ुश हो रही थी कि उसका अभी उसे अब भी बहुत प्यार करता है लेकिन ये कुछ ही देर में तमाशा बन गया

अभी ने गालियाँ देना start कर दिया कहने लगा तू चाहती क्या है मेरे माँ को रुलाती है उसे  ख़ुश नहि रखती और आज मैं जा रहा हू तो मुझे भी रुलाएगी ज़िन्दगी ख़राब कर दी तूने मेरी शोर बहुत तेज़ था बाहर के सब कमरे में गये अभी ने आयशा पे हाथ उठाया तो उसके छोटे भाई ने रोक लिया फिर आयशा के पास कोई चारा ना था सिवाय उनके पैरों में गिरकर माफ़ी माँगने के वो अपने जब अभी ने ये कह दिया इसके

इसके बाप को फ़ोन करो और बोलो की इसे लेके जाए आयशा को अपने उस बाप की याद गयी जिसने बड़े लाड़ प्यार से अपनी आयशा को पाला था और ये सुन कर वो जीते जी मर जाएगा उस बाप का चेहरा याद गया जो अपनी बच्ची के लिए बहुत कुछ किया था अब आयशा की बारी थी अपने पापा के लिए कुछ करने के लिए

आयशा ने अपने सारे emotion का गला दबा दिया पैरों में गिर पड़ी अभी और उसकी माँ की और माफ़ी माँगने लगी उसे उसकी बहुत सारी ग़लतियाँ गिनायी गयी सबने उसके आत्मसम्मान को रौंध दिया

आयशा बदल गयी सब ख़त्म हो गया उसके अंदर से अब वो एक डरी हुई सहमी हुई  बहु और बीवी है जो हर पल सबके चहरे देखती है हाज़िरजवाबी करती है वो अब समझ चुकी थी कि कि सपने कि दुनियाँ थी वो जो उसने शादी से पहले देखा उसका वहम टूट चुका था अब वो एक प्रेमिका नहि थी एक पत्नी बन चुकी थी जिसके सारे अधिकार ख़त्म हो चुके थे

अब उसे ये महसूस करने का भी अधिकार नहि था कि प्यार जैसा कोई  चीज़ भी होती है .

अब आयशा का हक़ीक़त से सामना हो चुका था सब बदल गया था

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