कुछ कहानियाँ अधुरी रह जाती है वो परी के बारे में सबसे पूछते रहते

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kuch kahaniya adhuri reh jati hai

कुछ कहानियाँ अधूरी रह गयी


ये तब की बात है जब लड़कियों और लड़कों में नया नया प्यार होता है लोग ख़ूबसूरती के पीछे भागते है परी भी ऐसी ही एक सुंदर जवान 22 साल की लड़की है और उसे भी एक smart लड़के कि तलाश थी वो लड़का उसे मिल गया दोनो के बीच ख़ूब प्यार बढ़ने लगा परी कुछ सच्ची सी थी मतलब प्यार को पूरे सच्चाई से निभाने वाली वो किसी और के बारे में सोचती भी ना थी सरद के अलावा

परी बाहर अकेले रहती थी पढ़ती थी तो माँ बाप से दूर रहती थी उसके रूम के बग़ल में एक रूम था उसमें एक बहुत सुंदर पढ़े लिखे पंडितजी रहते थे  जो परी को मन ही मन बहुत पसंद करते थे वो परी को छुप छुप के देखते थे पर परी को कुछ ना पता था

वो परी के बारे में सबसे पूछते रहते

फिर अचानक एक दिन परी की शादी तय हो गयी और परी अपने घर आ गयी . परी बहुत ख़ुश थी क्यूँकि उसकी शादी उसी लड़के से हो रही थी जिससे वो करना चाहती थी  परी की पढ़ाई भी पूरी हो चुकी थी परी अपने घर चली आयी पंडित जी को इन सब के बारे में कुछ भी पता नहि था पंडित जी ने कुछ picture चुपके से क्लिक किये थे  परी के जब वो बाल्कनी में कपड़े फैला रही थी खुले बालों में बहुत ही सुंदर picture थीं वो परी की रोज़  सुबह जग कर पहले picture देखते थे

उनको क्या पता परी किसी और की थी चली गयी इधर परी की शादी सरद से ख़ूब धूम धाम से हो गयी परी अपने ससुराल भी चली गयी परी बहुत ख़ुश थी फिर दोनो हनीमून पे Switzerland गये परी को बहुत अच्छा लग रहा था सब उसके लिए सपनो की दुनियाँ थी जब वो वापस आयी तो उसने फेसबुक पे अपने wedding और honeymoon के ढेर सारे pictures अपलोड किए

फिर एक दिन पंडितजी ने परी को search कर ही लिया और फिर जब उन्होंने सारी पिक्चर्स देखी तो shocked रह गये आँख में आँसू थे उनके

उन्हें क्या पता की जिस दुनिया की वो कल्पना कर रहे है वो दुनिया किसी और की है फिर पंडितजी ने hii का msg किया fb पे पंडितजी को परी ने पहचान लिया हल चल  पूछा पंडितजी ने सब बताया कि ठीक है और कहा कि आपने शादी में बुलाया भी नहि  परी ने लाइट्ली reply कर दिया पंडितजी ने अपने feeling के बारे में नहि बताया क्यूँकि उनको पता था हक़ीक़त कुछ और थी  but आज पंडितजी बहुत ख़ुश भी थे उनकी बात जो हो गयी थी कल्पना वाली लड़की से।  आज भी पंडितजी की सुबह परी के picture देखके ही होती है

पण्डित जी बहुत बड़े collage में प्रोफ़ेसर थे फिर वो busy हो गये अपनी कल्पना की दुनिया में।

कुछ कहानियाँ अधुरी रह जाती है

 

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